1 से 9 महीने तक प्रेगनेंसी में क्या क्या खाना चाहिए Pregnancy me Kya Khana Chahiye kya Nahi

1 से 9 महीने तक प्रेगनेंसी में क्या क्या खाना चाहिए Pregnancy me Kya Khana Chahiye kya Nahi
1 से 9 महीने तक प्रेगनेंसी में क्या क्या खाना चाहिए Pregnancy me Kya Khana Chahiye kya Nahi

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Pregnancy के दौरान विशेष आवश्यकताएँ

Pregnancy किसी औरत के जीवन का सबसे खास समय होता है। अब उस पर नए, अनजाने, लेकिन उसखे परिवाल के सबसे महत्वपूर्ण सदस्य को देखभाल का दायित्व आ जाता है।

Pregnancy धरण करने से लेकर प्रसव होने तक, बढ़ता शिशु (Growing Child) पूरी तरह माँ पर निर्भर होना है। माँ जो खाती व पिटी है, वही शिशु के विकास का मुख्य स्रोत होता है। वस्तुतः हाल मे हुए अनुसन्धानों से यह बात सामने आई है की जन्म के समय बच्चे का स्वास्थ्य, बचपन में और बाद के जीवन में, बहुत निकटता से pregnancy के दौरान माँ से प्राप्त पोषण से जुड़ा होता है।

Pregnancy के दौरान उचित पोषण लेने से बच्चे का वज़न जन्म के समय अच्छा (2500gm से ज्यादा ) होता है। यह नवजात शिशु में जन्म के समय होनेवाली खामियों को कम करने में मदद करता है। जिन शिशुओं का वज़न जन्म के चार महीने बाद तक मरने की अधिक संभावना होती है। उनमें बढ़े होने पर ह्रदय रोग, डायबटीज़ (Diabetes), हाइ ब्लड प्रैशर (High Blood Pressure) व उच्च कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों से ग्रस्त होने के खतरे भी अधिक होते हैं।

Pregnancy के दौरान विशेष आवश्यकताएँ

एक स्वास्थ्यकारी आहार anemia, high blood pressure, व Diabetes जैसी pregnancy के दौरान होने वाली से भी माँ को बचाता है। उत्तम पोषक आगर का सेवन करने से morning sickness , थकावट, कब्ज़ आदि से भी बचा जा सकता है। जो माएँ pregnancy के दौरान अपने आहार को सही रखती हैं, उनके लिए बहुत जल्दी ही pregnancy से पहले के वज़न को प्राप्त करना संभव होता है।

दो के लिए खाएं (Eat For Two)

स्वाभाविक है की एक pregnant महिला अपनी दैनिक पौष्टिक आवश्यकताओं के साथ-साथ, अपने अंदर पल रहे शिशु व अपने शरीर में आनेवाले बदलावों का सामना करने के लिए भी खाती हैं।

मर्जी और अधिक में खाने के बजाय pregnancy का समय ऐसा होता है जब सोच-समझकर व पौष्टिक आहार खाने की आवश्यकता होती है। वज़न मे होने वाली बढ़ौतरी (10-12 Kg) का मतलब यह नहीं है की pregnant महिला जरूरत से ज्यादा खाए। याद रखें, बेशक आप दो लोगों के लिए खा रह हों पर दूसरा  प्राणी बहुत छोटा है। प्रतिदिन केवल 300 calories अधिक लेना ही पर्याप्त है- वह भी केवल चार महीने पूरे हो जाने के बाद ही, जब शिशु तेजी से बढ़ना शुरू कर देता है। अतिरिक्त protein(15gm) व फैट (Fat) (10gm) खाने की भी सलाह दी जाती है।

Pregnancy के दौरान Developmental बदलाव (Fetus):

Pregnancy के 3 महीने बाद भी Fetus बहुत छोटा होता है। वह मात्रा 2 इंच लंबा व 15 ग्राम का होता है। उसके बाद, जन्म के समय तक, हड्डियाँ, मांसपेशियाँ, फैट, खून, मस्तिष्क व अन्य tissues तेजी से बनने लगते है, जब Fetus का वज़न 3200 ग्राम होता है। 9 महीनों तक Fetus को माँ से मिलनेवाले तैयार पोषक तत्वों की जरूरत होती है।

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इतना ही नहीं, pregnant महिला के शरीर मे कई important बदलाव भी होते हैं- विकसित हो रहे भ्रूण को जगह देने के लिए उसके प्रजनन अवयव विस्तृत हो जाते है। Fetus तक भोजन पहुँचने के लिए उसके रक्त के स्तर मे बढ़ोतरी हो जाती हैं और उसका संग्रहीत फैट pregnancy व बाद में स्तनपान करने की जरूरतों को पूरा करता है।

Pregnancy के दौरान एक औरत का वज़न लगभग 10-12 किलो बढ़ जाता है। बढ़ता शिशु, प्लासेंटा और एंनिओटिक द्रव से उसका आधा वज़न व बाकी माँ के शरीर मे होने वाले बदलावों से बढ़ता है।

अधिक वज़न की महिलाओं में वज़न बढ्न :

जरूरत अधिक वज़न (Overweight) व मोती महिलाओं मे pregnancy के दौरान Diabetes व hypertention होने के खतरे ज्यादा होते है। उनकी डेलेवेरी सिजेरियन होने की भी ज्यादा संभावनाएं रहती हैं। जब माँ मोती होती है तो Fetus के मर जाने (pregnancy के 7वें महीने से या 9वें महीने में), शिशुओं के हृदय संबंधी खामियों के साथ पैदा होने, समय से पहले बच्चा होने, तंत्रिका नाली में दोष या चार किलोग्राम से ज्यादा वज़न होने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं।

ज्यादा वज़न वाली स्त्रियॉं के लिए सामान्य वजनवली महिलाओं को सुझाए गए 10-12 किलोग्राम वज़न बढ्ने की तुलना में केवल 7-8 किलो वज़न बढ्न ही सही माना जाता है। इससे माँ के वसावाले ऊतकों मे व्रद्धि किए बिना Fetus का विकास सही ढंग से हो जाता है।

उसी के साथ-साथ, अधिक वजनवली pregnant औरतों को यह भी याद रखना चाहिए की Dieting  करने के लिए pregnancy सही समय नहीं है।

Dieting करने से शिशु को मिलनेवाले पोषक तत्वों में कमी हो जाएगी और इससे बच्चे के विकास पर असर पड़ेगा। उन्हे उस समय पौष्टिक आहार खाना चाहिए और अनावश्यक अधिक calories वाले भोजन का सेवन करने से बचना चाहिए।

Food Guide Piramid का पालन करें :

वयस्कों की तरह एक pregnant महिला भी Food Guided Pyramid का पालन करते हुए पौष्टिक आहार का सेवन कर सकती है। प्रेत्येक आहार समूह अलग-अलग पोषक तत्व प्रदान करता है, इसलिए प्रतिदिन सारे आहार समूहों मे से खाने से सम्पूर्ण आहार मिलता है।

सुझाई गई कैलोरी, प्रोटीन व fats की ज्यादा मात्रा को शामिल करने के लिए अपने खाने के ढंग में परिवर्तन करने की कोई जरूरत नहीं है। इस व्रद्धि की पूर्ति अतिरिक्त दलों (30gm) के साथ अनाजों(30gm) या दूध (100ml.), एक प्रकार की सब्जी या फल (प्रत्येक 100gm) और 1-2 प्रकार के fats (5-10gm) लेने से हो जाती है। इन भोज्य पदार्थों को या तो रोज़मर्रा के खाने में शामिल किया जा सकता है या दिन के समय अतिरिक्त नाश्ते की तरह खाया जा सकता है।

आहार में विविधता लाएँ :

pregnant महिला को micro-nutrients की भी अधिक मात्रा में जरूरत होती है। Iron, Folick acid, calcium and iodine के अतिरिक्त pregnancy vitamin A, vitamin C, अन्य B-complex vitamin तथा copper, chromium, mangnise, phosphorus, potassium etc. जैसे खनिजों की जरूरत मेन भी व्रद्धि करती है।

विभिन्न प्रकार के खाद्य पदार्थों का सेवन करने से यह सुनिश्चित सो जाता है की अधिकांश vitamins व खनिजों की आवश्यकता की पूर्ति हो जाए। प्रतिदिन एक जैसा ही आहार खाने से बचें। नए खाद्य पदार्थों को अपनाएं। नए व्यंजन बनाएँ। प्रतिदिन अलग-अलग तरह के फल व सब्जियाँ खाएं। अपने आहार को रंगीन बनाएँ।

एक स्वस्थ शुरुआत (A Healthy Begining) :

 pregnancy करने से पहले माँ की पौषणिक स्थिति की भी समान महत्ता है। जब आप पौष्टिक भोजन करतीं हैं तो आप और आपके शिशु उन पोशाक तत्वों से आरंभ करते है, जिनकी आवश्यकता आप दोनों की होती है। For eg. फॉलिक एसिड, जो आपके अजन्मे शिशु के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के विकास के लिए बहुत जरूरी होता है। आपको अपनी pregnancy का पता चलने से पहले के कुछ दिनों व सप्ताहों मे यह आवश्यक होता है।

खाने की ललक :

किसी खास चीज़ को खाने की इच्छा होना pregnancy का एक अहम हिस्सा है। अधिकांश ( लगभग 85%) महिलाओं को pregnancy के दौरान किसी एक चीज़ को खाने की बहुत लालसा होती है। मीठे, मसालेदार व खट्टे भोजन खाने की इच्छा होना बहुत ही आम है। अधिकतर लालसाएँ pregnancy के 3 महीनों तक खत्म हो जाती है।

इनमे से अधिक लालसाएँ उग्रता से पनपती हैं। वे कहाँ से पैदा होती हैं? Pregnancy के दौरान अधिकता में होनेवाले hormonal बदलाव स्वाद व सुगंध पर बहुत ज्यादा असर दल सकते हैं, फिर भी इसके बारे में कोई निश्चित धारणा नहीं है।

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विशेषज्ञों का मानना है की औरतों को इस ललक पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें पौष्टिक चीजों ही खानी चाहिए और कम पौष्टिक चीजों विकल्प ढूंढने चाहिए।

कभी-कभी pregnant स्त्रीयों के अंदर अजीब तरह की चीज़ें खाने की इच्छा पैदा होती है, जैसे- chalk, मिट्टी, cigarate, के टुकड़े आदि ( इस स्थिति को पिका कहा जाता है)। ये वास्तव में हानिकारक हो सकते हैं। उन चीजों को खाने की इच्छा न करें जो किसी अंधविश्वास, परंपरा या रिवाज पर आधारित हों और जिन्हें अक्सर माँ अपनी बेटी को बताती है।

इन पदार्थों क सेवन करने से बचें :

कैफीन (caffeine): कैफीन (caffeine) के अत्यधिक सेवन से गर्भपात के खतरे मे व्रद्धि हो सकती है, इसलिए एक दिन मे केवल एक या को कप चाय, कॉफी या कोला का ही सेवन करें या ऐसे पदार्थ लें, जिनमें कैफीन (caffeine) न हो। कैफीन (caffeine) का प्रयोग न करने ही सही है।

दवाइयाँ-   बिना चिकित्सीय सलाह के किसी भी तरह की जड़ी-बूटी, प्रक्रतिक supplements आदि का सेवन न करें। ये Fetus को नुकसान पहुंचा सकते है।

Smoking, Tobacco and Beer: pregnancy के दौरान ये चीज़ें सुरक्षित नहीं मनी जाती है। तीन चीजों से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। pregnancy के दौरान शराब का सेवन करने से ( प्रतिदिन एक ड्रिंक से ज्यादा ) गर्भपात, जन्म के समय बच्चे का कम वज़न व विकास मे असामान्यताएँ हो सकती हैं।

क्रत्रिम स्वीटनर : किसी भी तरह के क्रत्रिम मीठा करनेवाली चीजों, जिनमें सैक्रिन, सुकरलोज, etc. जैसे मीठे रसायन निहित हों, उनसे परहेज करना चाहिए। क्रत्रिम ढंग से मीठे किए गए पेय पदार्थों ( Diet Cock आदि ) और मिठाई आदि का सेवन न करें।

कच्चा या processed food :  

जब आप pregnant हों तो खाने से पैदा होनेवाली उन बीमारियों से बचना आवश्यक है जो जन्म के समय होनेवाले विकारों या गर्भपात का कारण बन सकती हैं। नरम, pasteurized न किया चीज़, pasteurized किया गया दूध , जूस, कच्चे अंडे या कच्चे अनदेवला भोजन निहित करें। इस नियम का पालन करें – ताजा ही उत्तम है। ताजे भोजन मेन पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा मेन होते हैं और अक्सर किसी भी तरह के preservative, रंग या स्वीटनेर से रहित होते हैं।

नमक का सेवन

Pregnancy के कारण उत्पन्न हुई हैपरटेंशन, प्रिकलेमपिसया और ईडिमा को रोकने के लिए भी नमक लेना कम नहीं करना चाहिए। हालांकि संतुलित मात्रा मेन नमक व सोडियम युक्त आहार का सेवन हर किसी के लिए उपयुक्त रेहता है, pregnancy के दौरान अत्यधिक रोक आमतौर पर अनुश्चित होती है। processed फूड का सेवन न करें जिनमे काफी मात्रा मेन सोडियम होता है।

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Event (स्थिति)             Description (विवरण) Solution (उपाय)
Morning Sickness (मॉर्निंग सिक्कनेस्स ) सुबह के समय जी मिचलाना या उल्टी आना pregnancy की आरंभिक अवशाओं मे बहुत ही आम है और जिस स्वाभाविक ढंग से वे आरंभ होती है, वैसे ही गायब भी हो जाती है। आहार मे सरल उपाय से इससे छुटकारा पाया जा सकता है। 1- बिस्तर से उठने से पहले बहुत ही कम मात्रा में सूखा स्नैक्स (Snacks) (कुछ बिसकुट, क्रैकर या टोस्ट) खाएँ।
2- बहुत कम मात्रा मे थोड़ी-थोड़ी देर बाद आसानी से पचनेवाला भोजन करें।
3- खाना खाने के बाद तरल पदार्थ लें, लेकिन खाने के साथ नहीं।
4- सख्त candy चूसे।
5- तले व अन्य वसायुक्त भोजन का सेवन न करें।
ऐसी खुशबू न लगाएँ जिससे जी मिचलाए ।
6- जब उल्टी न आ रही हो तो जितना खा सकती हों, उतना खा लें।
Acidity  (कब्ज़) Pregnancy के दौरान कब्ज़ होना एक आम समस्या है और जब आप iron supplements लेना आरंभ कर देती हैं तो स्थिति और खराब हो जाती है। इसलिए इस समय सबूत अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल व मेवे जैसे Fiber का सेवन करना उचित रेहता है। 1- पूरे दिन में कम-से-कम 8-12 गिलास तरल पदार्थ लें। किसी समय गरम चाय, सूप फायदा कर सकता है। स्नैक्स (snacks) की तरह खाने के लिए अपने पास हमेशा सूखे मेवे रखें जिनमें खनिज, विटामिन और fiber प्रचुर मात्रा में होता है। अत्यधिक मात्रा में fiber व तरल पदार्थों का सेवन करने से कब्ज़ से बचा जा सकता है।
2- डॉक्टर की सलाह के बिना लेक्सेटिव का प्रयोग न करें। पुरानी सुझाई जानेवाली विधि-केस्टर ऑइल से बढ़ें क्योंकि यह आपके शरीर को पोशाक तत्वों को पचाने की क्षमता को बाधित कर सकता है।
3- ज्यादा exercise करें, कब्ज़ दूर करने का यह सबसे उत्तम तरीका है।
Heart Burn (हार्ट बर्न ) Pregnancy के आखिरी चरणों में Acidity या गैस बनना आम बात है और अक्सर रात को आंतों व पेट पर बढ़े हुए uterus के दबाव के कारण होती है।   1- सोने से पहले कम भोजन करें।
2- कम मात्रा में कई बार भोजन करें।
3- तरल पदार्थ खाने के साथ लेने के बजाय खाने के बाद लें।
4- कमर से खुले परिधान पहलेन, धीरे-धीरे खाएँ,खाने के बाद कम से कम तीन घंटे तक सीधे बैठें, पलंग को सिर की तरह से ऊंचा कर लें।
5- पालक, फूलगोभी, ताला हुआ भोजन, कोला आदि जैसे भोजन से बचें जिनसे छाती मे जलन होती है।

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